
एक पुरुष अपने पैर को पकड़कर दर्द महसूस कर रहा है, जो लिगामेंट इंजरी या मांसपेशियों में खिंचाव की स्थिति को दर्शाता है।
लिगामेंट इंजरी (Ligament Injury) एक आम ऑर्थोपेडिक समस्या है जो अक्सर खेल-कूद, गिरने, अचानक मुड़ने या किसी एक्सीडेंट के कारण होती है। लिगामेंट्स शरीर की वे मजबूत रेशेदार संरचनाएं (fibrous tissues) होती हैं जो हड्डियों को आपस में जोड़कर जोड़ (joints) को स्थिर बनाए रखती हैं।
जब इन लिगामेंट्स पर जरूरत से ज्यादा खिंचाव पड़ता है या वे फट जाते हैं, तो उसे लिगामेंट इंजरी कहा जाता है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि लिगामेंट इंजरी क्या है, यह क्यों होती है, इसके लक्षण क्या हैं, इसका इलाज कैसे होता है और रिकवरी में कितना समय लगता है।
लिगामेंट एक मजबूत, लचीला टिशू होता है जो दो हड्डियों को जोड़कर जोड़ को स्थिरता देता है।
यह शरीर के मूवमेंट को कंट्रोल करता है ताकि जोड़ अपनी जगह से ज्यादा न हिले।
उदाहरण के लिए:
जब ये टिशू चोटिल हो जाते हैं, तो जोड़ कमजोर और अस्थिर महसूस होने लगता है।
तेजी से दिशा बदलना या अचानक पैर मुड़ जाना लिगामेंट इंजरी का सबसे आम कारण है। यह अक्सर खेलों जैसे फुटबॉल, बास्केटबॉल या क्रिकेट में देखा जाता है।
सीधे गिरने या गलत तरीके से लैंड करने पर जोड़ पर अचानक दबाव पड़ता है। इससे लिगामेंट खिंच या फट सकता है।
एथलीट्स और स्पोर्ट्स खेलने वालों में यह काफी आम है। तेज दौड़ना, कूदना या टकराव के कारण लिगामेंट पर जोर पड़ता है।
सड़क दुर्घटना या भारी चोट लगने पर लिगामेंट्स डैमेज हो सकते हैं। यह गंभीर मामलों में सर्जरी तक पहुंच सकता है।
अगर मांसपेशियां कमजोर हों, तो जोड़ पर ज्यादा दबाव पड़ता है और लिगामेंट चोटिल हो सकते हैं।
इसमें लिगामेंट हल्का खिंच जाता है लेकिन फटता नहीं है। दर्द हल्का होता है और सूजन कम होती है। सामान्यतः यह आराम से ठीक हो जाता है।
इसमें लिगामेंट आंशिक रूप से फट जाता है। दर्द ज्यादा होता है और चलने-फिरने में परेशानी होती है। सूजन भी स्पष्ट दिखाई देती है।
इसमें लिगामेंट पूरी तरह फट जाता है। जोड़ अस्थिर हो जाता है और व्यक्ति सामान्य रूप से चल भी नहीं पाता। कई मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
चोट लगते ही अचानक तेज दर्द महसूस होता है। यह दर्द मूवमेंट करने पर और बढ़ जाता है, खासकर जब जोड़ को हिलाया जाता है।
चोट के कुछ ही समय बाद प्रभावित हिस्से में सूजन आ जाती है। यह सूजन लिगामेंट के डैमेज और अंदरूनी ब्लीडिंग के कारण होती है।
लिगामेंट कमजोर होने पर जोड़ ढीला या अस्थिर महसूस होता है। कई बार ऐसा लगता है जैसे घुटना या एंकल “सपोर्ट नहीं दे रहा” हो।
चलने, उठने या किसी भी मूवमेंट में परेशानी होती है। गंभीर मामलों में व्यक्ति सामान्य रूप से चल भी नहीं पाता।
कई लोगों को चोट लगते समय “पॉप” जैसी आवाज सुनाई देती है। यह लिगामेंट फटने का संकेत हो सकता है।
डॉक्टर चोट की गंभीरता जानने के लिए कुछ जांच करते हैं:
MRI सबसे सटीक तरीका माना जाता है क्योंकि यह सॉफ्ट टिशू को साफ दिखाता है।
यह शुरुआती चरण में सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है।
डॉक्टर दर्द और सूजन कम करने के लिए दवाइयां दे सकते हैं। यह मरीज को आराम देने और मूवमेंट सुधारने में मदद करता है।
रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी बहुत जरूरी होती है।
इसमें:
जोड़ को स्थिर रखने के लिए ब्रेसेस का उपयोग किया जाता है। यह लिगामेंट को ठीक होने का समय देता है।
अगर लिगामेंट पूरी तरह फट गया हो, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। आजकल आर्थोस्कोपी जैसी मिनिमल इनवेसिव सर्जरी का उपयोग किया जाता है।
रिकवरी व्यक्ति की उम्र, चोट की गंभीरता और फिजियोथेरेपी पर निर्भर करती है।
एक्सरसाइज या खेल से पहले वॉर्म-अप करने से मांसपेशियां तैयार हो जाती हैं। यह चोट के खतरे को काफी कम करता है।
सपोर्टिव और ग्रिप वाले शूज पहनना बहुत जरूरी है। गलत फुटवियर से एंकल और घुटने पर दबाव बढ़ सकता है।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से जोड़ पर दबाव कम होता है और लिगामेंट सुरक्षित रहते हैं।
तेजी से दिशा बदलना या बिना तैयारी के कूदना चोट का कारण बन सकता है।
अगर दर्द हो रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें, तुरंत आराम लें।
लिगामेंट इंजरी को सही समय पर इलाज न मिलने पर यह लंबे समय तक परेशानी दे सकती है।
Prakash Hospital में अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन, MRI डायग्नोसिस और एडवांस फिजियोथेरेपी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां मरीज को चोट की गंभीरता के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट और रिहैबिलिटेशन प्लान दिया जाता है।
अगर आपको जोड़ में दर्द या अस्थिरता महसूस हो रही है, तो तुरंत जांच कराएं।
हल्की चोट आराम और थेरेपी से ठीक हो सकती है, लेकिन गंभीर चोट में इलाज जरूरी है।
गंभीर दर्द में चलने से बचना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
अगर इलाज न किया जाए तो यह लंबे समय तक जोड़ की समस्या बना सकता है।
नहीं, केवल गंभीर मामलों में।
आमतौर पर 2 हफ्ते से 6 महीने तक।
हां, यह रिकवरी का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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